किसान बही-

(1) हर बार जब इस अध्याय के अधीन अधिकार अभिलेख (खतौनी) तैयार की जाय, कलेक्टर
यथाशीघ्र प्रत्येक खातेदार को किसान बही देगा जिसमें ऐसा विवरण होगा जो विहित किया जाय।
(2) किसान बही ज़िले में किसी खातेदार द्वारा धृत समस्त जोत के संबंध में समेकित जोत-बही होगी।
(3) संयुक्त जोत की स्थिति में, इस धारा के प्रयोजन के लिए यह पर्याप्त होगा कि किसान बही केवल ऐसे
एक या अधिक अभिलिखित सह-खातेदारों को दी जाय जो इसके लिये आवेदन करें।
(4) खातेदार किसान बही के लिए ऐसा मूल्य ऐसी रीति से भुगतान करने का उत्तरदायी होगा, जैसी विहित की जाय।
(5) किसान बही रखने वाला प्रत्येक व्यक्ति अतिरिक्त भुगतान किए बिना समय-समय पर अधिकार अभिलेख में किये गये संशोधनों को अपनी किसान बही में समाविष्ट कराने का हकदार होगा।
(6) जब भी कोई बैंक या अन्य वित्तीय संस्था किसी खातेदार को खातेदार के ऐसे प्रत्यावेदन के आधार पर
ऋण प्रदान करता है कि वह किसान बही में अभिलिखित जोत का धारक है तो वह इस प्रकार दिये गये
ऋण के ब्योरे को किसान बही में पृष्ठांकित करेगा।
(7) खातेदार ऐसे बैंक या अन्य वित्तीय संस्था को यह घोषित करते हुए एक शपथ-पत्र प्रस्तुत करेगा कि उसने किसान बही में समाविष्ट जोत की प्रतिभूति पर कोई अन्य ऋण (जो पूर्णतः या अंशतः असंदत्त है) नहीं प्राप्त किया है और न ही उसने जोत या उसमें किसी अंश को किसी व्यक्ति को किसी अन्य रीति चाहे जो भी हो से, अन्तरित किया है।
(8) कोई खातेदार जो किसी ऐसे शपथ-पत्र में कोई ऐसा कथन करता है जो असत्य है और वह उसकी जानकारी या विश्वास के अनुसार असत्य है या उसके सत्य होने के विषय में उसका विश्वास नहीं है, तो
वह किसी प्रकार के कारावास से, ऐसी अवधि के लिए जो तीन वर्ष तक हो सकती है, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी भागी होगा।
(9) ऐसा बैंक या अन्य वित्तीय संस्था ऋण के अन्तिम पुनर्भुगतान को किसान बही पर पृष्ठांकित करेगी।