नियम बनाने की शक्ति-

(1)  राज्य  सरकार,  अधिसूचना  द्वारा, इस  संहिता  के  प्रयोजनों  को  कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकती है।
(2) पूर्ववर्ती शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियमों में निम्नलिखित की भी व्यवस्था की जा सकती हैः-
(एक) परिषद के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की सेवा की अवधि और शर्ते;
(दो)  परिषद  के  कार्य  के  वितरण  का  विनियमन  और  अपनी  अधिकारिता  के  क्षेत्रीय  मण्डलों  को बनाना;
(तीन) राजस्व क्षेत्रों के परिवर्तन, समाप्ति या सृजन के लिए दिशा निर्देश;
(चार)  सीमाओं  के  निर्धारण  की  प्रक्रिया,  सीमा  चिन्हों  का  विनिर्देश,  निर्माण  और  अनुरक्षण,  उनकी लागत का उद्ग्रहण और वसूली;
(चार-क)  उपलब्ध  आधुनिक  तकनीक  एवं  अंकीकरण  प्रक्रिया  के  प्रयोग  द्वारा  सर्वे  क्रिया  और अभिलेख क्रिया जिसके अन्तर्गत आबादी का सीमांकन भी सम्मिलित है, के लिए प्रक्रिया;
(पांच) इस संहिता के अधीन नक्शां, दस्तावेजां, विवरणों, अभिलेखों और रजिस्टरों को तैयार करने और  अनुरक्षण  की  प्रक्रिया,  उनके  निरीक्षण और  उनकी  प्रमाणित  प्रतिलिपियां  या  उद्धरण  देने  की प्रक्रिया;
(छः)  उत्तराधिकार  और  अन्तरण  के  विषय  में  रिपोर्ट  प्रस्तुत  करने,  रजिस्ट्रीकरण  प्राधिकारी  द्वारा तहसीलदार  को  सूचना  देने  और  ग्रामीण  अभिलेखों  जिसमें  नामान्तरण  और  ग्रामीण  अभिलेखों  को ठीक करना भी है, की प्रक्रिया;
(सात) किसान  बही  को  तैयार  करने,  उसकी  आपूर्ति  तथा  उसके  अनुरक्षण  की  प्रक्रिया  और  उससे सम्बन्धित मामले जिसमें उसके लिए प्रभारित की जाने वाली फीस भी है;
(आठ)  सार्वजनिक  सड़क,  पथों  या  नहरों  के  किनारे  वृक्षारोपण  से  संबंधित  और  आबादी  और अनाध्यासित भूमि में वृक्षों से सम्बन्धित विवादों के अवधारणा की प्रक्रिया;
(नौ) राज्य सरकार, ग्राम  पंचायत  या अन्य स्थानीय प्राधिकारी की या उसमें निहित सम्पत्तियों के संरक्षण, परिरक्षण और निपटाने की प्रक्रिया जिसमें उसकी नुकसानी, दुर्विनियोग या सदोष दखल के लिए मुआवजा का अवधारणा भी है;
(दस) भू-राजस्व के निर्धारण के सिद्वान्त  जिसमें इसका फेरफार, परिहार, निलम्बन और प्रभाजन भी है;
(ग्यारह) भू-राजस्व और अन्य सार्वजनिक धन के संग्रह की प्रक्रिया और उसकी विभिन्न प्रक्रियाओं के निष्पादन से सम्बन्धित मामले जिसमें लागत और संग्रहण प्रभार नियत करना भी शामिल है;
(बारह)  लगान  नियत  करने  और  उसके  संराशीकरण  की  प्रक्रिया  जिसमें  ऐसी  परिस्थितियां  भी शामिल है जिनमें लगान का बकाया बट्टे खाते में डाला जा सकता है;
(तेरह) किसी ग्राम पंचायत या किसी भूमि प्रबन्धक समिति से सम्बन्धित मुकदमें में विधि व्यवसायियों की नियुक्ति की प्रक्रिया और ऐसी नियुक्तियों की अवधि और शर्तें;
(चौदह)  वादों,  अपीलों  और  अन्य  कार्यवाहियों  के  संचालन  और  अभियोजन  से  सम्बन्धित  प्रक्रिया जिसमें इस संहिता के अधीन विभिन्न जांच करने की प्रक्रिया भी है;
(पन्द्रह)  कलेक्टर  द्वारा  पट्टा  देने,  ऐसे  पट्टा  का  निरस्तीकरण  और  राज्य  सरकार,  ग्राम  पंचायत और स्थानीय प्राधिकारी की भूमि से अप्राधिकृत अध्यासियों की बेदखली की प्रक्रिया;
(सोलह) ग्राम  पंचायत  को सौंपी गयी भूमि का आवंटन, आवंटी को कब्जा वापस दिलाना और ऐसे आवंटन के निरस्तीकरण से सम्बन्धित प्रक्रिया;
(सत्रह) इस संहिता के अधीन अधिकारिता वाले किसी अधिकारी या प्राधिकारी के कर्तव्य और उनके
द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया;
(अठारह)  ऐसी  समय  सीमा  आरोपित  करना  जिसके  भीतर  इस संहिता  के  अधीन  विनिर्दिष्ट  कोई कार्य किया जाना चाहिए;
(उन्नीस) इस संहिता के अधीन वादों, अपीलो,ं जाने वाली फीस; प्रार्थना-पत्रों और अन्य कार्यवाहियों के सम्बन्ध में दी
(बीस) किसी ग्राम  पंचायत  या अन्य स्थानीय प्राधिकारी को सौंपी गयी नदियां, झीलां, पोखरों और तालाबों में मछलियां पकड़ने के लिए विनियमित करना;
(इक्कीस)  चरागाह,  श्मशान  घाट  या  कब्रिस्तान  और  गांवों  में  पशुओं और  चिड़ियें  को  पकड़ने, शिकार करने या गोली मारने को विनियिमित करना;
(बाइस) इस संहिता के अधीन कोई अन्य विषय जिसमें नियम  बनाये जाने  हों  या  बनाये  जा  सकते हों।
(3) किन्हीं निरसित अधिनियमनों के अधीन राज्य सरकार या परिषद द्वारा इस संहिता  के प्रारम्भ होने के पूर्व बनाए गए और ऐसे प्रारम्भ के दिनांक को प्रवृत्त नियम और आदेश, जहां तक वे इसके उपबन्धों से असंगत नहीं हैं, तब तक प्रवृत्त बने रहेंगे जब तक कि वे इस संहिता के उपबन्धों के अनुसर विखंडित, परिवर्तित या प्रतिस्थापित न कर दिये जायें।
(4) इस धारा के अधीन नियम बनाने में राज्य सरकार के लिए यह विहित करना विधिपूर्ण होगा कि कोई व्यक्ति जो उसका उल्लंघन करे, ऐसे उल्लंघन से होने वाले अन्य परिणाम के अतिरिक्त पचीस हजार रूपये से  अनधिक  ऐसे  जुर्माने  से  दण्डनीय  होगा  जिसे  इस  प्रयेजन  के  लिए  विनिर्दिष्ट  अधिकारी  या  प्राधिकारी आरोपित करना उचित समझे।