विनियमावली बनाने की शक्ति-

(1) इस संहिता के उपबन्धों और तदधीन बनाये गये नियमों के अधीन
रहते हुए, परिषद, राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से निम्नलिखित के लिए, विनियमावली बना सकती है-
(क) इस संहिता के अधीन वादों, प्रार्थना पत्रों और कार्यवाहियों के सम्बन्ध में राजस्व न्यायालयों और राजस्व अधिकारियों को शासित करने की प्रक्रिया; और
(ख)  भू-अभिलेख  और  उससे  सम्बन्धित  मामलों  के  तैयार  करने, अनुरक्षण  और  पर्यवेक्षण  के  लिए दिशा निर्देश;
(ग)  तहसीलदार और  नायब  तहसीलदार के  कर्तव्य  विहित  करने और उनकी  तैनाती, स्थानान्तरण और अस्थायी रिक्तियों में उनकी नियुक्ति विनियमित करने के लिए;
(घ)   याचिका लेखकों को अनुज्ञप्ति जारी करने की प्रक्रिया;
(ड़)   ऐसे अन्य मामले जो नियमावली द्वारा विहित किये जायें।
(2) उपधारा (1) के अनुसार बनाए गए सभी विनियमों में विधि का बल होगा।
(3) इस संहिता के प्रारम्भ होने के दिनांक को प्रवृत्त, राजस्व न्यायालय मैनुअल, भू-अभिलेख मैनुअल, संग्रह मैनुअल और भू-राजस्व (सर्वे तथा अभिलेख संक्रिया) नियमावली, 1978,  उस  सीमा तक, जिस  सीमा तक वे इस  संहिता  के  उपबन्धों  से  असंगत  नहीं  हैं,  तब  तक  प्रवृत्त बने  रहेंगे  जब  तक  कि  इस  धारा  के  अधीन बनाए गए विनियमों द्वारा विखण्डित, परिवर्तित या प्रतिस्थापित न कर दिये जायें।